अगर आप राजस्थान के किले और दुर्ग पढ़ रहे है तो आपको चित्तौड़गढ़ दुर्ग के बारे में पढ़ना जरूरी होता है। क्योंकि उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण किलों में से एक चित्तौड़गढ़ का किला राजपूतों के साहस, शौर्य, त्याग, बलिदान और बड़प्पन का प्रतीक है। चित्तौड़गढ़ का यह किला राजपूत शासकों की वीरता, उनकी महिमा एवं शक्तिशाली महिलाओं के अद्धितीय और अदम्य साहस की कई कहानियों को प्रदर्शित करता है।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग का निर्माण 7वीं शताब्दी में मौर्य शासकों द्धारा किया गया था।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग करीब 700 एकड़ की जमीन में फैला हुआ है।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग अपनी भव्यता, आर्कषण और सौंदर्य की वजह से साल 2013 में यूनेस्को द्धारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग में तीन साकै1303, 1534, 1567-68 में हुए हैं।
●जयमल की हवेली चित्तौड़गढ़ दुर्ग में है इस हवेली का निर्माण महाराजा उदयसिंह के काल में हुआ।
●इस दुर्ग में प्रमुख जल स्त्रोत भीमलत कुंड, रामकुंड व चित्रांगद मोरी तालाब है।
●इस दुर्ग का सबसे बडा आकर्षण राणा रत्नसिह की रानी पद्मिनी का महल है ।
●चित्तौढ़ दुर्ग की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाले जयमल और फत्ता की वीरता से प्रसन्न होकर अकबर ने आगरा के किले के प्रवेश द्वार पर इनकी हाथी पर सवार संगमरमर की प्रतिमाए स्थापित करवाई।
●चित्तौड़ दुर्ग को समुद्र तल से ऊँचाई लगभग 1850 फीट है।
●माना जाता है कि इसका निर्माण बघेरवाल जैन जीजा द्वारा करवाया गया है।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग गंभीरी और बेड़च नदियों के संगम पर स्थित है।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग में सात मंजिला जैन कीर्ति स्तम्भ है।
●इस दुर्ग को प्राचीन किलों का सिरमौर कहा जाता है।
●इस दुर्ग में नौ खण्डों वाला विजय स्तम्भ है । इसकी ऊंचाई 12 फीट है।
●विजय स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी पर विजय के उपलक्ष्य मे करवाया।
●इस स्तम्भ का वास्तुकार जैता था।
●विजय स्तम्भ को हिन्दू देवी-देवताओं का अजायबघर कहा जाता है।
इस अनूठी वास्तुशैली से निर्मित विजय स्तंभ को शक्तिशाली शासक राणा कुंभा द्धारा बनवाया गया था। करीब 37.2 मीटर ऊँची इस अद्भुत संरचना के निर्माण में करीब 10 साल का लंबा समय लगा था। विजय स्तंभ की सबसे ऊपरी एवं नौवीं मंजिल पर घुमावदार सीढि़यों से पहुंचा जा सकता है, वहीं इससे चित्तौड़गढ़ शहर का अद्भुत नजारा देख सकते हैं।
पहले जैन तीर्थकर आदिनाथ को सर्मपित इस स्तंभ को जैन मूर्तियों से बेहद शानदार तरीके से सजाया गया है। इस भव्य मीनार के अंदर कई तीर्थकरों की मूर्तियां भी स्थापित हैं। इस तरह कीर्ति स्तंभ का ऐतिहासिक महत्व होने के साथ-साथ धार्मिक महत्व भी है।
राजपूतों के अदम्य साहस का प्रतीक माने जाने वाले इस विशाल चित्तौड़गढ़ के दुर्ग के परिसर में बना राणा कुंभा महल भी इस किले के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है।
राणा कुंभा महल में मुख्य प्रवेश द्धार सूरल पोल के माध्यम से भी घुसा जा सकता है। राणा कुंभा पैलेस में ही मीरा बाई समेत कई प्रसिद्ध कवि भी रहते थे। इस महल में कई सुंदर मूर्तियां भी रखी गई हैं, जो कि इस महल के आर्कषण को और अधिक बढ़ा रही हैं।
पद्मिनी महल एक तीन मंजिला इमारत है, जिसके शीर्ष को मंडप द्धारा सजाया गया है।
Interesting facts about chittorgarh fort
चित्तौड़गढ़ दुर्ग का इतिहास - History Of Chittorgarh Fort in Hindi :
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग का निर्माण 7वीं शताब्दी में मौर्य शासकों द्धारा किया गया था।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग करीब 700 एकड़ की जमीन में फैला हुआ है।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग अपनी भव्यता, आर्कषण और सौंदर्य की वजह से साल 2013 में यूनेस्को द्धारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग में तीन साकै1303, 1534, 1567-68 में हुए हैं।
●जयमल की हवेली चित्तौड़गढ़ दुर्ग में है इस हवेली का निर्माण महाराजा उदयसिंह के काल में हुआ।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग के प्रथम दरवाजे का नाम पाण्डुपोल, दूसरा द्वार भैरवपोल, तीसरा द्वार गणेशपोल चौथा द्वार लक्ष्मणपोल, पाँचवा द्वार जोड़न पोल, छठा द्वार त्रिपोलिया तथा सातवां द्वार रामपोल है।
●इस दुर्ग में विष्णु के वराह अवतार का कुम्भश्याम मंदिर है इसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने किया है।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग मे विजय स्तम्भ, कुम्भ स्वामी मंदिर, कुम्भा के महल, श्रृंगार चंवरी का मंदिर, चार दिवारी सात द्वार का निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया।
●भैरव पोल के पास ही वीर कल्ला राठौड़ की छतरी स्थित है।●इस दुर्ग में प्रमुख जल स्त्रोत भीमलत कुंड, रामकुंड व चित्रांगद मोरी तालाब है।
●इस दुर्ग का सबसे बडा आकर्षण राणा रत्नसिह की रानी पद्मिनी का महल है ।
●चित्तौढ़ दुर्ग की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाले जयमल और फत्ता की वीरता से प्रसन्न होकर अकबर ने आगरा के किले के प्रवेश द्वार पर इनकी हाथी पर सवार संगमरमर की प्रतिमाए स्थापित करवाई।
●चित्तौड़ दुर्ग को समुद्र तल से ऊँचाई लगभग 1850 फीट है।
●माना जाता है कि इसका निर्माण बघेरवाल जैन जीजा द्वारा करवाया गया है।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग गंभीरी और बेड़च नदियों के संगम पर स्थित है।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग में सात मंजिला जैन कीर्ति स्तम्भ है।
●इस दुर्ग को प्राचीन किलों का सिरमौर कहा जाता है।
●इस दुर्ग में नौ खण्डों वाला विजय स्तम्भ है । इसकी ऊंचाई 12 फीट है।
●विजय स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी पर विजय के उपलक्ष्य मे करवाया।
●इस स्तम्भ का वास्तुकार जैता था।
●विजय स्तम्भ को हिन्दू देवी-देवताओं का अजायबघर कहा जाता है।
चित्तौड़गढ़ किले के अंदर बनी शानदार संरचनाएं एवं प्रमुख आर्कषण:
1. विजय स्तंभ –
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के अंदर बना विजय स्तंभ इस किले के प्रमुख आर्कषण एवं दर्शनीय स्थलों में से एक है। इस स्तंभ को मालवा के सुल्तान महमूद शाह की खिलजी ऊपर जीत के जश्न में बनाया गया था।इस अनूठी वास्तुशैली से निर्मित विजय स्तंभ को शक्तिशाली शासक राणा कुंभा द्धारा बनवाया गया था। करीब 37.2 मीटर ऊँची इस अद्भुत संरचना के निर्माण में करीब 10 साल का लंबा समय लगा था। विजय स्तंभ की सबसे ऊपरी एवं नौवीं मंजिल पर घुमावदार सीढि़यों से पहुंचा जा सकता है, वहीं इससे चित्तौड़गढ़ शहर का अद्भुत नजारा देख सकते हैं।
2. कीर्ति स्तंभ –
भारत के इस विशाल दुर्ग के परिसर में बना कीर्ति स्तंभ या ( टॉवर ऑफ फ़ेम ) भी इस किले की सुंदरता को बढ़ा रहा है। 22 मीटर ऊंचे इस अनूठे स्तंभ का निर्माण जैन व्यापारी जीजा जी राठौर द्धारा दिया गया था।पहले जैन तीर्थकर आदिनाथ को सर्मपित इस स्तंभ को जैन मूर्तियों से बेहद शानदार तरीके से सजाया गया है। इस भव्य मीनार के अंदर कई तीर्थकरों की मूर्तियां भी स्थापित हैं। इस तरह कीर्ति स्तंभ का ऐतिहासिक महत्व होने के साथ-साथ धार्मिक महत्व भी है।
3. कुंभश्याम मंदिर –
भारत के इस सबसे विशाल किले के दक्षिण भाग में मीराबाई को समर्पित कुंभश्याम मंदिर बना हुआ है।4. राणा कुंभा महल –
यह अति रमणीय महल विजया स्तंभ के प्रवेश द्धार के पास स्थित है, इस महल को चित्तौड़गढ़ किले का सबसे प्राचीन स्मारक भी माना जाता है। वहीं उदयपुर नगरी को बसाने वाले राजा उदय सिंह का जन्म इसी महल में हुआ था।राजपूतों के अदम्य साहस का प्रतीक माने जाने वाले इस विशाल चित्तौड़गढ़ के दुर्ग के परिसर में बना राणा कुंभा महल भी इस किले के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है।
राणा कुंभा महल में मुख्य प्रवेश द्धार सूरल पोल के माध्यम से भी घुसा जा सकता है। राणा कुंभा पैलेस में ही मीरा बाई समेत कई प्रसिद्ध कवि भी रहते थे। इस महल में कई सुंदर मूर्तियां भी रखी गई हैं, जो कि इस महल के आर्कषण को और अधिक बढ़ा रही हैं।
5. रानी पद्मिनी महल –
राजस्थान की शान माने जाने वाले चित्तौड़गढ़ किले का यह बेहद खूबसूरत और आर्कषक महल है। पद्मिनी पैलेस इस किले के दक्षिणी हिस्से में एक सुंदर सरोवर के पास स्थित है।पद्मिनी महल एक तीन मंजिला इमारत है, जिसके शीर्ष को मंडप द्धारा सजाया गया है।
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चित्तौड़गढ़ दुर्ग के बारे में अन्य महत्वपूर्ण तथ्य :
●यह दुर्ग सबसे बडा लिविंग फोर्ट है।
●माना जाता है कि भीम ने महाभारत काल में अपने घुटने के बल से यहाँ पानी निकाला था।
●इस दुर्ग के प्रमुख मंदिर कुम्भ श्यामा, मीरां, श्रृंगार चंवरी, नीलकंठ व कालिका माता का है।
●चित्तौड़ दुर्ग में एक जल यंत्र (अरहट) स्थित है।
●गुहिलों ने नागदा के विनाश के बाद इसे अपनी राजधानी भी बनाया था।
●इस दुर्ग में लघु दुर्ग के रूप में नौ कोटा मकान या नवलखा भंडार बना है, जिसका निर्माण राणा बनवीर ने करवाया था।
●चित्तौड़गढ़ दुर्ग के उत्तरी दिशा में स्थित खिडकी को लाखोटा की बारी के नाम से जाना जाता है।
●इस दुर्ग में कृषि की जाती है।
●यह राज्य का सबसे बडा दुर्ग है।
चित्तौड़गढ़ के किले पर हुए आक्रमण:
राजस्थान की शान माने जाने वाले चित्तौड़गढ़ के इस ऐतिहासिक किले पर कई हमले और युद्द भी किए गए, लेकिन समय-समय पर राजपूत शासकों ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए इस किले की सुरक्षा की।
चित्तौड़गढ़ किले पर 15वीं से 16वीं शताब्दी के बीच 3 बार कई घातक आक्रमण हुए।
1.अलाउद्दीन खिलजी ने किया चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर आक्रमण:
1303 ईसवी में अल्लाउद्दीन खिलजी ने इस किले पर आक्रमण किया था। दरअसल, रानी पद्मावती की खूबसूरती को देखकर अलाउद्धीन खिलजी उन पर मोहित हो गया, और वह रानी पद्मावती को अपने साथ ले जाना चाहता था, लेकिन रानी पद्मावती के साथ जाने से मना करने जिसके चलते अलाउ्दीन खिलजी ने इस किले पर हमला कर दिया।
2.गुजरात के शासक बहादुर शाह ने किया चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर आक्रमण :
चित्तौड़गढ़ के इस विशाल दुर्ग पर 1535 ईसवी में गुजरात के शासक बहादुर शाह ने आक्रमण किया और विक्रमजीत सिंह को हराकर इस किले पर अपना अधिकार जमा लिया।
3.मुगल बादशाह अकबर ने किया चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर हमला:
मुगल शासक अकबर ने 1567 ईसवी में चित्तौड़गढ़ किले पर हमला कर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। वहीं राजा उदयसिंह ने इसके खिलाफ संघर्ष नहीं किया और इसके बाद उन्होंने पलायन कर दिया, और फिर उदयपुर शहर की स्थापना की।
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